**"तू मिला भी नहीं"**
तेरी यादों की बारिश में भीगता रहा,
अपने ही दिल से मैं हारता रहा।
तू पास थी मगर मेरी हुई नहीं,
मैं तेरे नाम का दीप जलाता रहा।
ख़ामोश रातों ने पूछा कई दफ़ा,
क्यों आँखों में इतना धुआँ है भला?
मैं मुस्कुरा के हर दर्द छुपाता रहा,
तेरे बिना भी तुझको निभाता रहा।
तू मिला भी नहीं, फिर भी खो गया,
मेरा हर सपना तुझमें ही सो गया।
जो लिखा था दिल ने तेरे नाम पर,
वो अधूरा सा किस्सा ही हो गया।
तू मिला भी नहीं, फिर भी खो गया...
चाँद भी आजकल मुझसे बात नहीं करता,
तेरे जाने का ग़म अब कम नहीं करता।
हर गली में तेरा ही चेहरा दिखे,
ये दिल किसी और पर यक़ीन नहीं करता।
वक़्त ने लाख कोशिश की भरने की,
पर ये ज़ख्म तेरी याद से सिलते नहीं।
कुछ रिश्ते मुकम्मल होकर भी टूटते हैं,
कुछ अधूरे होकर भी मिटते नहीं।
तू मिला भी नहीं, फिर भी खो गया,
मेरा हर सपना तुझमें ही सो गया।
जो लिखा था दिल ने तेरे नाम पर,
वो अधूरा सा किस्सा ही हो गया।
अगर कभी तेरी राहों में मेरा नाम आए,
तो ठहर के ज़रा दिल की धड़कन सुनना।
मैं आज भी वहीं हूँ जहाँ छोड़ गई थी तू,
बस लौट के कभी मेरा मौसम चुनना।
अब दुआओं में तेरा ज़िक्र नहीं करता,
पर तुझे भूल जाऊँ ऐसा भी नहीं होता।
कुछ मोहब्बतें मुकद्दर में नहीं होतीं,
फिर भी दिल उनसे जुदा नहीं होता...!
तू मिला भी नहीं, फिर भी खो गया...!
©RKPal
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