नशे की गिरफ़्त में हैं जुगनू
ज़ख़्म देंगे वो दलीलें देंगे,
हम हैं बारिश वो सीढ़ियाँ देंगे।
ख़ामोशी को भी बेच आए हैं,
अब ये आवाज़ को हथकड़ियाँ देंगे।
राख से खेलकर जो निकले हैं,
वो शोलों को भी साज़िशें देंगे।
हमने सूरज उगाया है आँखों में,
ये अँधेरों को ताबीरें देंगे।
सच को तौले बिना जो बोले हैं,
वो हर इक बात में तराज़ियाँ देंगे।
नशे की गिरफ़्त में हैं जुगनू,
पक्का है कि अब सूरज को गालियाँ देंगे।
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